सबके लिए सुलभ उपासना - साधना
Quick Overview
कोई अवांछनीय स्थिति व्यापक रूप से त्रास पहुँचा रही हो, तब उसके विरुद्ध एकजुट होना और सामना करने के लिए समर्थ शक्ति को एकत्रित करना व प्रयोग करना, अर्थात 'आन्दोलन' करना आवश्यक हो जाता है | वर्तमान विश्वव्यापी समस्या से निपटने के लिए भी साधना-आन्दोलन जैसे प्रबल जागरण अभियान की आवश्यकता अनुभव हुई है | इस नब्ज को युग निर्माण मिशन ने पहचाना है और उस अनुसार अपने लक्ष्य निर्धारित किए हैं | साधना-आन्दोलन के लक्ष्य हैं-"उपासना-साधना-आराधना के द्वारा (१) एक-एक मानव मन को संतुलन में लाना, (२) मानव मन को सृजनात्मक दिशा में क्रियाशील करना और (३) इन दो जन-अभियानों का व्यापक प्रसार कर विश्वमानव के मन की उग्रता को शांत करना, उसे सृजन-सहयोग में प्रयुक्त करना |"
Product Description
आज की विश्वव्यापी समस्या
संसार को त्रस्त कर रही वर्तमान परिस्थितियों से हम सभी अवगत हैं | चारों और शोषण, अत्याचार, अनाचार, का एकछत्र राज्य है | प्रत्येक व्यक्ति अशांत और असंतुलित है, अत्याचारी भी और पीड़ित भी | प्रकृति और मानव दोनों की उग्रता चरम सीमा पर है | इन उग्राताओं ने व्यक्ति के विचार और व्यव्हार बदल डाले हैं, मानव -मूल्यों को लुप्तप्राय कर दिया है और जीवन जीने के उद्देश्यों को ही तहस -नहस कर दिया है और लगता कि हम सब जलते हुए नरक में जी रहे हैं |
समस्या के निराकरण का उपाय
इस भयावह समस्या को सुलझाने के प्रयास किए तो जा रहे हैं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों की स्वयंसेवी संस्थाएँ निरंतर प्रयत्न तो कर रही हैं, पर कोई स्थाई समाधान अभी तक निकल नहीं पाया है | मानव की विनाशकारी वृत्तियाँ अजेय सिद्ध हो रही हैं |
इन विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी युग के निर्माण के लिए संकल्पित हमारा मिशन द्रढ़ आस्था लिए इस समस्या को सुलझाने में निरंतर कार्यरत है | हमारा सोच और कार्य पद्धति अन्य संस्थाओं से भिन्न है | हमारी मान्यता है कि स्थूल समस्याओं की जड़ मानस में होती है | अंत: जड़ का, मूल कारण का इलाज करना चाहिए | इसलिए यदि प्रकृति की उग्रता का और विश्वव्यापी समस्याओं का मूल कारण मानव मन की उग्रता है, तो मानव मन का पुननिर्माण ही मानव जाति के उज्जवल भविष्य का एकमात्र अमोघ उपाय हो सकता है | स्पष्ट है कि ऐसा पुननिर्माण मनोवैज्ञानिक- आध्यात्मिक प्रक्रियाओं द्वारा ही संभव है |
साधना-आन्दोलन की आवश्यकता
कोई अवांछनीय स्थिति व्यापक रूप से त्रास पहुँचा रही हो, तब उसके विरुद्ध एकजुट होना और सामना करने के लिए समर्थ शक्ति को एकत्रित करना व प्रयोग करना, अर्थात 'आन्दोलन' करना आवश्यक हो जाता है | वर्तमान विश्वव्यापी समस्या से निपटने के लिए भी साधना-आन्दोलन जैसे प्रबल जागरण अभियान की आवश्यकता अनुभव हुई है | इस नब्ज को युग निर्माण मिशन ने पहचाना है और उस अनुसार अपने लक्ष्य निर्धारित किए हैं | साधना-आन्दोलन के लक्ष्य हैं-"उपासना-साधना-आराधना के द्वारा (१) एक-एक मानव मन को संतुलन में लाना, (२) मानव मन को सृजनात्मक दिशा में क्रियाशील करना और (३) इन दो जन-अभियानों का व्यापक प्रसार कर विश्वमानव के मन की उग्रता को शांत करना, उसे सृजन-सहयोग में प्रयुक्त करना |"
हमारी इस मान्यता से भी आप संभवत: सहमत होंगे कि मानव मन के पुननिर्माण जैसा कठिन व अदभुत कार्य केवल वास्तविक धर्म ही कर सकता है | वास्तविक धर्म याने ईश्वर की तीन आज्ञाओं का पालन- पवित्र विचार,सबके हित का भाव और कर्तव्यपरायणता | इसीलिए इन ईश्वरीय आज्ञाओं की विश्वव्यापी पूर्ति करने का महान उद्देश्य सामने रखकर युग निर्माण मिशन ने वसंत पर्व २००१ से सात आंदोलनों को आरम्भ करने की घोषणा की है | इनमें साधना-आन्दोलन प्रथम स्थान पर है, क्योंकि यह अपने आप में तो पूर्ण है ही, शेष छह आंदोलनों का भी पोषण करने की सामर्थ्य रखता है |

