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नवयुग का मत्स्यावतार

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नवयुग का मत्स्यावतार

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Number of Pages 32
Writer’s name पं० श्रीराम शर्मा आचार्य
Edition/Year of Publishing 2009
Hard Bound/Paper Back Paper Back
Publisher name युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा

Quick Overview

 

ब्रह्मा जी प्रातःकाल  संध्या-वंदन के लिए बैठे | चुल्लू में आचमन के लिए पानी लिया | 'उसमें एक छोटा सा कीड़ा विचरते देखा | ब्रह्माजी ने सहज उदारतावश उसे जल भरे  में कमण्डल में छोड़ दिया और अपने क्रिया-कृत्य में लग गए | थोड़े ही समय में वह कीड़ा बढ़कर इतना बड़ा हो गया कि सारा कमण्डल ही उससे भर गया | अब उसे अन्यत्र भेजना आवश्यक हो गया | उसे समीपवर्ती तालाब में छोड़ा गया | थोड़े ही समय में वह कीड़ा बढ़कर इतना बड़ा हो गया कि सारा कमण्डल ही रस से भर गया | उसे समीपवर्ती तालाब में छोड़ा गया | देखा गया कि वह तालाब भी उस छोटे से कीड़े के विस्तार से भर गया | अब उसे अन्यत्र भेजना आवश्यक हो गया | देखा गया कि वह तालाब भी उस छोटे से कीड़े के विस्तार से भर गया | इतनी तेज प्रगति और विस्तार को देखकर वे स्वयं आश्चर्यचकित हुए और एक दो बार इधर-उधर उठक - पटक करने के बाद उसे समुद्र में पहुँच आए | आश्चर्य यह कि संसार भर का जल थल क्षेत्र उसी छोटे कीड़े के रूप में उत्पन्न हुई मछली ने घेर लिया |

 

Product Description

 

इतना विस्तार आश्चर्यजनक, अभूतपूर्व, समझ में न आने योग्य था | जीवधारियों की कुछ सीमाएं, मर्यादाएँ होती हैं, वे उसी के अनुरूप गति पकड़ते हैं, पर यहाँ तो सब कुछ अनुपम था | ब्रह्माजी, जिनने उस मछली की जीवन-रक्षा और सहायता की थी, आश्चर्यचकित रह  गए | बुद्धि के काम न देने पर वे उस महामत्स्य ने कहा-मैं जीवधारी दीखता भर हूँ, वस्तुतः परब्रह्म हूँ | इस अनगढ़ संसार को जब भी सुव्यवस्थित करना होता है, तो उस सुविस्तृत कार्य को संपन्न करने के लिए अपनी सत्ता को नियोजित करता हूँ | तभी अवतार प्रयोजन की सिद्धि बन पड़ती है |

 

ब्रह्माजी और महामत्स्य आपस में वार्तालाप करते रहे | सृष्टि को नई साज-सज्जा के साथ सुन्दर-समुन्नत करने की योजना बनाकर, उस निर्धारण की जिम्मेदारी ब्रह्माजी पर सौंपकर, वे अन्तर्धान हो गये और वचन दे गए कि जब कभी अव्यवस्था को व्यवस्था में बदलने की आवश्यकता पड़ेगी, उसे संपन्न करने के लिए मैं तुम्हारी सहायता करने के लिए अदृश्य रूप में आता रहूँगा |

 

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