रामायण में पारिवारिक आदर्श
Quick Overview
रामायण सत शिक्षाओं का भंडार है | एक प्राचीन कथा के माध्यम से रचयिता ने दिखलाया है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य का व्यवहार कैसा होना चाहिए ? पिता -पुत्र के कर्त्तव्य, माता की ममता, सास -बहु का मधुर संबंध भाइयों का निस्वार्थ प्रेम, ससुराल वालों का सदभाव, पति-पत्नी की पारस्परिक निष्ठा , नारी जाती की मान्यता और सम्मान आदि सभी समाज निर्माण और व्यव्क्ति निर्माण से सम्बंधित विषयों को ऐसे सरल और प्रभावशाली प्रसंगों के द्वारा समझाया गया है की छोटे -बड़े सभी पर हितकारी प्रभाव पड़ सकता है |
Product Description
भारतवर्ष का समाजतंत्र इस समय परिस्थितियों के बदल जाने से बहुत विकारग्रस्त हो गया है | विशेष से पारिवारिक जीवन में ऐसी विषमताएँ उत्पन्न हो गई हैं, जिनके कारण ९५ प्रतिशत परिवारों में बाह्य और आंतरिक वैमनस्य की घटनाएँ होती रहती हैं, जो अनेक बार मरकत और हत्याकांडों में भी परिणत हो जाती हैं | ऐसे लोगों के लिए " रामचरितमानस " की शिक्षाएँ निस्संदेह अनमोल सिद्व होंगी | इस पुस्तक में राम -लक्ष्मण के अनुपम सहयोग, भारत की निस्वार्थ निष्ठा और कर्त्तव्य पालन, सीता की पतिनिष्ठा, निषादराज गुह का शुद्व मैत्री -भाव आदि के जो प्रसंग उठाए गए हैं, वे पाठक की मनोवृति पर निश्चय ही अनुकूल प्रभाव डालने वाले हैं | उनसे शिक्षा ग्रहण करके अपनी परिस्थितियों में सुधर करना सबके लिए कल्याणकारी होगा |
१. नारी का श्रद्धेय स्वरूप
२. महिलाओं के प्रति मान्यता सुधारें
३. दाम्पत्य का आदर्श और निर्वाह
४. अभिभावकों के कर्त्तव्य और मर्यादाएँ
५. पारिवारिक जीवन में आदर्श भ्रातृत्व
६. परिवार आदर्शनिष्ठ बने
७. ससुराल पक्ष में नीति और निर्वाह
७. सुसंस्कारिता का वातावरण
८. अनीति के विरुद्ध संघर्ष

