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कर्मकांड भास्कर

Karmakand Bhaskar

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कर्मकांड भास्कर

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Number of Pages 374
Writer’s name पं० श्रीराम शर्मा आचार्य
Edition/Year of Publishing 2008
Hard Bound/Paper Back Hard Bound
Publisher name युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा

Quick Overview

 

प्रभावी कर्मकांड के सूत्र

 

यज्ञ-संस्कार आदि कर्मकांड भारतीय ऋषि-मनीषियों द्वारा लम्बी शोध एवं प्रयोग-परीक्षण द्वारा विकसित असामान्य क्रिया-कृत्य हैं | इनके माध्यम से महत चेतना तथा मानवीय पुरुषार्थ की सूक्ष्म योग साधना को दृश्य-श्रव्य (आडियो विजुअल) स्वरूप दिया गया है | इसमें अनुशासनबद्ध स्थूल क्रिया-कलापों के द्वारा अन्तरग की सूक्ष्म शक्तियों को जाग्रत एवं व्यवस्थित किया जाता है | औषधि निर्माण क्रम में अनेक प्रकार के उपचार करके सामान्य वस्तुओं में औषधि के गुण पैदा कर दिये जाते हैं | मानवीय अंतःकरण में सत्प्रवृत्तियों, सदभावनाओं, सुसंस्कारों के जागरण, आरोपण, विकास व्यवस्था आदि से लेकर महत चेतना के वर्चस्व बोध कराने, उनसे जुड़ने, उनके अनुदान ग्रहण करने तक के महत्वपूर्ण क्रम में कर्मकांडों की अपनी सुनिश्चित उपयोगिता है | इसलिए न तो उनकी उपेक्षा की जानी चाहिए और न उन्हें चिन्ह पूजा के रूप में करके सस्ते पुण्य लूटने की बात सोचनी चाहिए | कर्मकांड के क्रिया-कृत्यों को ही सब कुछ मान बैठना या उन्हें एकदम निरर्थकमान लें, दोनों ही हानिकारक हैं | उनकी सीमा भी समझें, लेकिन महत्व भी न भूलें | संक्षिप्त करें ; पर श्रद्धासिक्त मनोभूमि के साथ ही करें, तभी वह प्रभावशाली बनेगा और उसका उद्येश्य पूरा होगा |

 

Product Description

 

यज्ञादि कर्मकांड द्वारा देव आवाहन, मन्त्र प्रयोग, संकल्प एवं सदभावनाओं की सामूहिक शक्ति से एक ऐसी भट्टी जैसी ऊर्जा पैदा की जाती है, जिसमें मनुष्य की अन्तः प्रवृत्तियों तक को गलाकर इच्छित स्वरूप में ढलने की स्थिति में लाया जा सकता है | गलाई के साथ ढलाई के लिए उपयुक्त प्रेरणाओं का संचार भी किया जा सके, तो भाग लेने वालों में वांछित, हितकारी परिवर्तन बड़ी मात्रा में लाये जा सकते हैं | इस विद्या का यतकिंचित ही सही, पर ठीक दिशा में प्रयोग करने के कारण ही युग निर्माण अभियान के अंतर्गत संपन्न होने वाले यज्ञों में गुण, कर्म, स्वभाव परिवर्तन के संकल्पों के रूप में बड़ी सँख्या में जन-जन द्वारा देवदक्षिनाएँ  अर्पित की जाती हैं |

 

इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों की ओर आकर्षित होती हैं, मन सुख की कल्पना में डूबना चाहता है, बुद्धि विचारों से प्रभावित होती है ; परन्तु चित्त और अन्तःकरण में जहाँ स्वभाव और आकांक्षाएँ उगती रहती हैं, उसे प्रभावित करने में ऊपर के सारे उपचार अपर्याप्त सिद्ध होते है | यज्ञ संस्कारादी ऐसे सूक्ष्म-विज्ञान के प्रयोग हैं, जिनके द्वारा मनुष्य के व्यक्तित्व का कायाकल्प कर सकने वाली उस गहराई को भी प्रभावित, परिवर्तित किया जा सकता है | जो लोग युग निर्माण अभियान तथा उसके सूत्र संचालकों के व्यापक प्रयोग परिक्षण से परिचित हैं, उन्होंने लाखों व्यक्तियों के जीवन में इस विद्या को फलित होते देखा है |

 

ऐसे अति महत्वपूर्ण कार्य को पूरी निष्ठा और पूरी जागरूकता से किया जाना चाहिए | उनमें मर्म समझने एवं उन्हें क्रियान्वित कर सकने की कुशलता तथा प्रवृत्ति विकसित करने का प्रयास मनोयोगपूर्वक बराबर करते रहना चाहिए |

 

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