AWGP E-store

Skip to Main Content »

Search Site

Category Navigation:

उपासना के दो चरण - जप और ध्यान

Upasana Ke Do Charan - Jap Aur Dhyan

Double click on above image to view full picture

Zoom Out
Zoom In

More Views

  • Upasana Ke Do Charan - Jap Aur Dhyan

उपासना के दो चरण - जप और ध्यान

Be the first to review this product

Availability: In stock.

Rs 5.00
Add Items to Cart
OR

Additional Information

Number of Pages 40
Writer’s name पं० श्रीराम शर्मा आचार्य
Edition/Year of Publishing 2008
Hard Bound/Paper Back Paper Back
Publisher name युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा

Quick Overview

 

प्रतीक उपासना की पार्थिव पूजा के कितने ही कर्मकांडों का प्रचलन है | तीर्थयात्रा, देवदर्शन, स्तवन, पाठ, षोडशोपचार, परिक्रमा, अभिषेक, शोभायात्रा , श्रद्धांजलि, रात्रि-जागरण, कीर्तन आदि अनेकों विधियाँ विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में अपने-अपने ढंग से विनिर्मित और प्रचलित हैं | इससे आगे का अगला स्तर वह है, जिसमें उपकरणों का प्रयोग न्यूनतम होता है और अधिकांश कृत्य मानसिक एवं भावनात्मक रूप से ही सम्पन्न करना पड़ता है | यों शारीरिक हलचलों, श्रम और प्रक्रियाओं का समन्वय उनमें भी रहता ही है |

उच्चस्तरीय साधना क्रम में मध्यवर्ती विधान के अंतर्गत प्रधानतया दो कृत्य आते हैं | ( १ ) जप ( २ ) ध्यान | न केवल भारतीय परम्परा में वरन समस्त विश्व के विभिन्न साधनाप्रचलनों में भी किसी न किसी रूप में इन्हीं दो का सहारा लिया गया है | प्रकार कई हो सकते हैं, पर उन्हें इन दो वर्गों के ही अंग-प्रत्यंग के रूप में देखा जा सकता है |

 

Product Description

 

साधना की अंतिम स्थिति में शारीरिक या मानसिक कोई कृत्य करना शेष नहीं रहता | मात्र अनुभूति, संवेदना, भावना तथा संकल्प शक्ति के सहारे विचार रहित शून्यावस्था प्राप्त की जाती है | इसी को समाधि अथवा तुरीयावस्था कहते हैं | इसे ईश्वर और जीव के मिलन की चरम अनुभूति कह सकते हैं | ब्रह्मानंद का परमानन्द का अनुभव इसी स्थिति में होता है | इसे ईश्वर और जीव के मिलन की चरम अनुभूति कह सकते हैं | इस स्थान पर पँहुचने से ईश्वर प्राप्ति का जीवन लक्ष्य पूरा हो जाता है | यह स्तर समयानुसार आत्म-विकास का क्रम पूरा करते चलने से ही उपलब्ध होता है | उतावली में काम बनता नहीं बिगड़ता है | तुर्त-फुर्त ईश्वर दर्शन, समाधि स्थिति, कुंडलिनी जागरण, शक्तिपात जैसी आतुरता से बाल बुद्धि का परिचय भर दिया जा सकता है | प्रयोजन कुछ सिद्ध नहीं होता | शरीर को सत्कर्मों में और मन को सद्विचारों में ही अपनाये रहने से जीव सत्ता का उतना परिष्कार हो सकता है, जिससे वह स्थूल और सूक्ष्म शरीरों को समुन्नत बनाते हुए कारण शरीर के उत्कर्ष से सम्बद्ध दिव्या अनुभूतियाँ और दिव्य सिद्धियाँ प्राप्त कर सके |

समयानुसार उस अंतिम स्थिति की, कालेज पाठ्यक्रम की भी, शिक्षा उपलव्ध हो जाती है | ऐसी दिव्य सत्ताएँ इस संसार में मौजूद हैं जो पात्रता के तालाब को बादलों की तरह बरस कर सदा भरा-पूरा रखने को अयाचित सहायता प्रदान कर सकें | हमें शरीर के जड़ और मन के अर्द्ध चेतन स्तरों को परिष्कृत बनाने में ही अपना सारा ध्यान केन्द्रित करना चाहिए | साधना विज्ञानकी दौड़ इन्हीं दो क्षेत्रों के विकास में सहायता करने वाले विधि-विधान बताने में केन्द्रीभूत है | इतना बन पड़े तो अगली बात निखिल ब्रहमाण्ड में संव्याप्त दिव्य चेतना के प्रत्यक्ष मार्ग दर्शन पर छोड़ी जा सकती है | अपना आपा ही इतना ऊँचा उठ जाता है कि पृथ्वी की आकर्षण शक्ति से ऊपर निकल जाने के बाद रॉकेट जिस प्रकार अपनी यात्रा करने लगते हैं, उसी प्रकार स्वयमेव आत्म साधन का शेष भाग पूरा हो जाता है |

आत्मोत्कर्ष की जिन कक्षाओं का सैद्धांतिक और व्यावहारिक पाठ्यक्रम सीखने, सिखाने की आवश्यकता पड़ती है | वे चिंतन की उत्कृष्टता एवं कर्तृत्व के आदर्शवादिता के साथ अविच्छिन्न रूप से जुड़े हुए हैं | उनकी उपेक्षा करके मात्र कर्मकांडों के सहारे कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लग सकती | व्यक्तित्व को अमुक विधि-विधानों के सहारे ऊँचा उठाने की शिक्षा की किंडरगार्डन शिक्षण में प्रयुक्त होने वाले मनोरंजन उपकरणों से तुलना की जा सकती है, जो बच्चे के अविकसित मस्तिष्क में अमुक जानकारी को ठीक तरह जमाने में सहयता करती है | पहलवानी में सफलता पाने वाले डम्बल, मुदगर आदि उपकरणों का सहारा लेकर अपनी बल वृद्धि करते हैं | ऊँचा चढ़ने के लिए लाठी की और जल्दी पहुँचने के लिए वाहन की आवश्यकता पड़ती है | यह उपकरण बहुत ही उपयोगी और आवश्यक हैं, पर यह ध्यान रखना चाहिए की स्वतन्त्र रूप से कोई जादुई शक्ति से सम्पन्न नहीं हैं | स्वस्थ शरीर को बलिष्ठ बनाने में वे सहायता भर करते हैं | ठीक यही स्थिति उपासना क्षेत्र में फैले हुए अनेकानेक कर्मकांडों की है |

 

Product Tags

Add Your Tags:
Use spaces to separate tags. Use single quotes (') for phrases.
 

My Cart

You have no items in your shopping cart.

Community Poll

The inspirational songs in the audio CD 'जीवन पथ' give excellent guidance about leading a holistic life. Do you agree?