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युवा क्रान्ति पथ

Yuva Kranti Path

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युवा क्रान्ति पथ

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Number of Pages 132
ISBN Number 81-8255-016-5
Writer’s name डॉ० प्रणव पण्ड्या
Edition/Year of Publishing 2006
Hard Bound/Paper Back Paper Back
Publisher name शान्तिकुंज, हरिद्वार

Quick Overview

 

'युवा क्रांति पथ ' पर चलकर राष्ट्रीय जीवन में महापरिवर्तन ला सकते हैं पर इसकी शुरुआत उन्हें अपने से करनी होगी अपने अन्तस में कहीं छुपी -दबी क्रान्ति की चिंगारियों को फिर से दहकाना होगा व्यवस्थाएँ बदल सकती हैं, विवशताएँ मिट सकती हैं, पर तब जब  युवा चेतना में दबी पड़ी क्रांति की चिन्गारियाँ महाज्वालाएं बनें इनकी विस्फोटक गूंज पुरे राष्ट्र में ध्वनित हो इनके प्रकाश व ताप को देखकर विश्व कह उठे -दुनिया की कोई शक्ति और  उसके द्वारा किए जाने वाले अवरोध अब उसकी राह नहीं रोक सकते | युवा भारत जाग उठा है

 

Product Description

 

इस पुस्तक की प्रत्येक पंक्ति लिखने वाले की अनुभूति में डूबी है लिखते समय की अतीत बन चुकी किशोर वय और अभी कुछ ही दूर पीछे छुटी युवावस्था बार -बार अन्त;करण में क्रांतिबीज बनकर फूटी हैं जलते -तड़पते हुए ह्रदय की भावनाओं की स्याही से इसे लिखा गया है | कि क्या देश  के युवा भी इसे भावनाओं में भीग कर पढ़ेगे ? क्या उनकी तरुणाई कुछ विशेष करने को अकुलाएगी ? इन प्रश्रों के जवाब में  अन्तरिक्ष  में 'हां' की गूंजा सुनाई देती है | अपना अन्त;करण जितना अनुभव कर पाता है -उससे यही लगता है की सर्वनियन्ता युग देवता , महाकाल युवाओं को क्रांतिपथ पर चलाना चाहते हैं |

 

लेखक अपने विद्यार्थी जीवन से परम पूज्य गुरुदेव के प्रत्यक्ष सान्निध्य में रहा है उसने दशकों की अवधि उनके साथ साथ गुजारी है इस लम्बी अवधि में उसने गुरुदेव के ह्रदय में उफनते महाक्रान्ति के ज्वार को देखा है उसने अनुभव किया है -उनके ह्रदय कुण्ड में धधकती क्रान्तिवह्रि को,जिसमें स्वयं की आहुति दे डालने के लिए उसका मन बार -बार मचला है | सामर्थ्य भर ऐसा किया भी गया है | बारी अब आज के युवाओं की है, जिनसे धरती माता -भारत माता और महा अन्तरिक्ष में व्यास स्वयं भगवान महाकाल उम्मीदें लगाए बैठे हैं | युवा चेतना चेते और अपनी माँ की कोख और उसके दूध की लाज रखे |

 

स्वार्थ की चिंता से -अहं की प्रतिष्ठा से देश और धरती की माँग हमेशा  बड़ी होती है लेखक ने अपने जीवन में यही जाना सिखा है युवा चिन्ता न करें प्रबल वायु बड़े वृक्षों से ही टकराती है | अग्नि को कुरेदने पर वह और भी प्रज्वलित होती है युवा शक्ति से टकराने वाले अवरोध उसके संकल्प और क्षमता को बढ़ाने का ही साधन बनते हैं | अपना अनुभव पहले भी यही था और आज भी यही है | जब ह्रदय में पीड़ा होती है, जब मालुम होता है की प्रकाश कभी न होगा, जब आशा और सहस का प्राय; लोप होता है, तब इस भयंकर आंतरिक -आध्यात्मिक तूफान के बीच गुरुदेव की कृपा की अन्त ज्योर्ति चमकती है | हे भारत माता की संतानों ! यह अन्त ज्योर्ति आपके अन्तस में भी है | इसे निहारें और क्रान्ति पथ पर चल पड़ें | इस पुस्तक के लेखक को अपना साथी -सहचर मानें | हम सब साथ -साथ युवा क्रान्ति पथ पर चलें | इसी शुभ भावना के साथ युवा क्रान्ति पथ प्रत्येक पंक्ति आप सभी को, देश  के प्रत्येक नवयुवक -नवयुवती को अर्पित है | आपकी क्रान्ति कीचिन्गारियाँ कल की महाक्रान्ति की ज्वालाएँ बनेंगी,इसकी प्रतीक्षा है |

 

 

१ युवा शक्ति

२ सार्थक यौवन के लिए चाहिए आध्यात्मिक द्रष्टि

३ इतिहास साक्षी है युवा शौर्य का

४ प्रकाशदीप हैं ये संस्मरण

५ कौन हो युवाओं का आदर्श ?

६ समझें युवा मन का दर्द

७ दिशाहीनता और भटकाव, क्या हो समाधान?

८ रोजगार राष्ट्रीय कर्त्तव्य है, यह जातिवाद से न जुड़ने पाए

९ स्वरोजगार: जहाँ चाह,वहाँ राह

१० नैतिकता के टूटते तटबंधों के बिच कुछ सत्प्रयास

११ भावनात्मक भटकन से उबरें युवा

१२ सोच में आ रहा आध्यात्मिक परिवर्तन

१३ जीवन लक्ष्य कैसे मिले ?

१४ हो, संकल्प शक्ति का विकास

१५ सहयोग-सदभाव का एक अनूठा उदाहरण

१६ राष्ट्र निष्ठ-प्रेरणा स्रोत ये युवा

१७ संस्कृति बनाती है संस्कारवान

१८ होगी,अवश्य होगी क्रांति

१९ जरुरत है फिर युग भागीरथों की

२० युवा चेतना राजनीति में परिवर्तन लाए

२१ पूरा विश्व बने एक विद्यालय

२२ युवाओं का श्रष्ट आचार्यों के साथ समन्वय

२३ सम्रद्धि को पराकाष्ठा पर पहुँचाते भारत के युवा

२४ ग्रामोत्थान को समर्पित एक युवा

२५ जनक्रांति लायेगें हम मीडिया द्वारा

२६ आध्यात्मिक प्रबंधन के सीखे जाँय गुर

२७ युवा शक्ति साधक बनें

२८ स्वाध्याय-सत्संग दैनिक जीवन का अंग बनें

२९ संस्कृति संवेदना को युवतियाँ जनव्यापी बनाएँ

३० करें भागीदारी विचार क्रांति अभियान में

३१ चिरयुवा हमारे गुरुदेव

३२ एक साहसी जीवन संगिनी

३३ युवा हो चला भारत देश हमारा

३४  राष्ट्र कुण्डलिनी युवा महाशक्ति का जागरण

३५ युवाओं की गढ़ने की एक टकसाल: देव संस्कृति विश्वविद्यालय

३६ समग्र क्रांति हेतु युवाशक्ति का भाव भरा आह्वान

 

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