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युग की मांग प्रतिभा परिष्कार

Yug Ki Mang Pratibha Parishkar

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युग की मांग प्रतिभा परिष्कार

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Number of Pages 64
Writer’s name पं० श्रीराम शर्मा आचार्य
Edition/Year of Publishing 2009
Hard Bound/Paper Back Paper Back
Publisher name शान्तिकुंज, हरिद्वार

Quick Overview

 

वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी का जीवनोद्येश्य युगनिर्माण-युगपरिवर्तन की ईश्वरीय योजना के अनुरूप स्थूल एवं सूक्ष्म तंत्र  विकसित करना रहा है | उनके व्यक्तित्व और कर्तृत्व का गहरे से अध्ययन करने पर उनके अन्दर ऋषियों की तरह युगद्रष्टा और युगस्रष्टा की विविध क्षमताएँ दिखाई देती हैं | इसलिए उन्हें 'युगऋषि' के गरिमामय संबोधन के साथ याद किया जाता है | 

'युग निर्माण' उसके नाम के अनुरूप बहुत बड़ा और असाधारण कार्य है | बड़े विशिष्ट कार्य के लिए बड़ी क्षमताओं वाली विशिष्ट प्रतिभाओं की आवश्यकता पड़ती है | युगऋषि कहते रहे हैं कि-

 

'युग निर्माण' भगवान का कार्य है और इसे वे ही संपन्न करेंगे | फिर भी भगवान की आदत रही है कि वे युग परिवर्तनकारी कार्यों में उस युग की परिष्कृत प्रतिभाओं को माध्यम बनाकर आगे बढ़ने की रीती-निति अपनाते हैं | भगवान श्रीराम के साथ ऋषियों से लेकर रीछ वानरों तक का योगदान, भगवान श्रीकृष्ण के साथ ग्वाल-बालों से लेकर पाण्डवों तक की भूमिका प्रभु कि उसी परम्परा का प्रमाण प्रस्तुत करती है | इस युग में भी ऐसा ही होना है |

 

Product Description

 

प्रतिभाएँ हर युग में तथा जीवन के हर क्षेत्र में देखी जाती हैं | प्रतिभाएँ अनगढ़ भी होती हैं और परिष्कृत भी | अनगढ़ प्रतिभा अनगढ़ कार्यों में तथा परिष्कृत प्रतिभा लोकहितकारी परिष्कृत उद्येश्यों में सहज ही प्रवृत्त हो जाती है | अनगढ़-अपरिष्कृत प्रतिभाओं को पौराणिक उद्येश्यों में सहज ही प्रवृत्त हो जाती है | अनगढ़-अपरिष्कृत प्रतिभाओं को पौराणिक काल के राक्षसों से लेकर वर्तमान में परपीड़ा के - राक्षसी कार्यों में प्रवृत्त देखा जा सकता है | परिष्कृत प्रतिभाएँ, अवतारियों, पैगम्बरों, ऋषियों से लेकर संत-शहीदों के रूप में परिलक्षित होती रहती हैं |

 

प्रतिभाओं की धाराओं में परिवर्तन भी होते देखे जाते हैं | रत्नाकर को वाल्मीकि, अंगुलिमाल को बौद्ध भिक्षु, गणिका एवं आम्रपाली से साध्वी रूप में परिवर्तित होते हुए देखा गया है | अस्तु, आज भले ही विभिन्न प्रतिभाएँ भटककर ऊटपटांग कार्यों में प्रवृत्त होती दिखती हों; किन्तु उनके अन्दर का जाग्रत आत्मतत्व ईश्वरीय सन्देश को सुन-समझकर आदर्श की दिशा में पूरी ईमानदारी से प्रवृत्त हो सकता है |

 

सभी प्रतिभाएँ भटक गई हों, ऐसा भी नहीं है | तमाम लोकसेवी संगठनों से लेकर राष्ट्रीय गरिमा को बढ़ाने वाले वैज्ञानिकों, पदाधिकारियों, व्यवसाइयों में भी उन्हें सक्रिय देखा जा सकता है |

युगऋषि ने यह बात अपनी लेखनी और वाणी से बार-बार दोहराई है कि तमाम जाग्रत आत्माएँ विभिन्न क्षेत्रों में-विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं | काल प्रभाव से वे सुप्त अथवा जंग लगी जैसी स्थिति में पड़ी हैं | विचार क्रांति के स्पर्श से उनमें जैसे ही जाग्रति आएगी, उनके चमत्कारी पुरुषार्थ-परिणाम प्रकट होने लगेंगे |

 

युग कि माँग प्रतिभा परिष्कार नामक इस पुस्तिका में युगऋषि  प्रतिभाओं को खोज-खरादकर युग धर्म में प्रवृत्त करने की ईश्वरीय योजना को स्पष्ट रूप  से प्रस्तुत कर रहे हैं | पहले उन्होंने इसे दो भांगों में लिखा था | बाद में उन्हीं के निर्देशन में इसे एक ही पुस्तक के रूप में सम्पादकीय कर दिया गया | आशा की जाती है कि विभिन्न प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व युगऋषि  के सुझावों सूत्रों के आधार पर प्रतिभा परिष्कार का लाभ उठाते हुए ईश्वरीय दिव्य अनुदानों को पाने की प्रमाणिक पात्रता अर्जित कर सकेंगे |

 

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