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योग चिकित्सा संदर्शिका

Yoga Chikitsa Sandarshika

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योग चिकित्सा संदर्शिका

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Additional Information

Number of Pages 48
Writer’s name डॉ० प्रणव पण्ड्या
Edition/Year of Publishing 2005
Hard Bound/Paper Back Paper Back
Publisher name शान्तिकुंज, हरिद्वार

Quick Overview

 

योग सभी प्रकार के कष्टों का निवारण करने में सक्षम है | आज मनुष्य अशांत है, दुखी है एवं शारीरिक-मानसिक विकारों से दग्ध है | कहा भी गया है"अशान्तस्य कुतः सुखं" - अशांत व्यक्तियों को सुख कहाँ से मिलेगा ? शांति के लिए भी एवं विभिन्न कष्टों से मुक्ति पाने हेतु योग व्यायाम, , प्राणायाम,ध्यान आदि का प्रावधान हमारे ऋषियों ने किया है | आज जिस तरह से जीवन शैली के रोग बढ़ते जा रहे हैं, योग की आवश्यकता उतनी ही बढती जा रही है | विशेषकर जिनकी जीवनशैली आज के द्रुतगामी, विज्ञानप्रधान, भोगवादी समाज में जीते हुए गडबडा गई है, कुछ प्रयोग ऐसे हैं जो कम समय में ही खूब लाभ देने में सक्षम हैं |

 

Product Description

 

देव संस्कृति विश्वविद्यालय ने अपने दो वर्ष की अल्प अवधि में ही ढेर सारी उपलब्धियाँ अपनी झोली में डाल ली हैं | "योग एवं मानवी चेतना विज्ञान"विभाग ने परम्परागत योग के साथ व्यावहारिक प्रयोगों को जोड़कर आसन-प्राणायाम-मुद्राओं आदि के कुछ मिश्रित प्रयोग ऐसे किये हैं, "योग एवं मानवी चेतना विज्ञान" विभाग ने परम्परागत योग के साथ व्यावहारिक प्रयोगों को जोड़कर आसन-प्राणायाम-मुद्राओं आदि के कुछ मिश्रित प्रयोग ऐसे किये हैं,जिनसे ढेरों व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं | हमारे छात्र-छात्राएँ निष्णात आचार्य-आचार्यों के मार्गदर्शन में स्वयं तो इसे करते ही हैं, अन्यों को भी सिखातें हैं | इसका लाभ उन्हें भी मिला है | शरीर, मन व अंतःकरण की समग्र स्वस्थता ही इस युग की चिकित्सा-पद्धति को देनी होगी | मैं समझता हूँ कि हमारे योग विज्ञान विभाग के प्रवक्ता श्री कामख्या कुमार ने इन प्रयोगों को क्रमबद्ध कर एक पुस्तिका के रूप में प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास किया है | इसे पढ़कर भली-भाँति समझकर किन्हीं भी उपयुक्त व्यक्ति  मार्गदर्शन में स्वयं भी किया जा सकता है एवं तनावमुक्त शांति से भरा स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है | औषधियों के बिना जीते हुए व्यक्ति

 

कर्मयोगी बन सही अर्थों में अपने जीवन सार्थक कर सकता है | मैं विभाग को एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं को साधुवाद देता हूँ एवं इनकी उपचार प्रक्रिया कि सफलता के लिए हार्दिक मंगलकामनाएँ संप्रेषित करता हूँ | गुरुसत्ता से भाव भरी प्रार्थना है कि वे उन्हें अनुदान दें एवं आगे चलकर और भी बड़े स्तर पर ऐसे प्रकाशनों हेतु अपने ज्ञान का प्रयोग करने कि शक्ति दें |  

 

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