महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग - १
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महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग आस्था संकट की इस वेला में कष्टदायी तपन के बीच जल की ठंडी बूदों के छींटों की तरह काम करते हैं । महापुरुषों के सत्संग की महिमा सभी ग्रन्थ एवं शास्त्रों में बताई गई है । समयानुकूल कभी भी कोई शंका उत्पन्न हो तो उसका समाधान पाने के लिए विद्वान्, संत, ज्ञानवान, चरित्रवान व्यक्तियों के संपर्क से उसे निर्मूल कर लेना चाहिए । आज की परिस्थितियाँ बदल गयी है, सत्संग योग्य उच्च कोटि के सत्यवादी, प्रखर एवं निस्पृह व्यक्तित्व के धनी बहुत ही कम देखने को मिलते हैं, जो तथाकथित धर्मोपदेशक शास्त्र-महिमा का गान करते दिखाई पड़ते हैं, उनके आचरण में वे गुण न उतर पाने के कारण कोई प्रभाव जनमानस पर पड़ता नहीं देखा जाता । सामान्य जनता के लिए आत्मिक प्रगति की ओर अग्रसर करने वाला ज्ञान, व्यक्तित्व को ऊँचा उठाने का एकमात्र उपाय, महापुरुषों के संस्मरणों का स्वाध्याय ही माना जा सकता है । जब कभी जिज्ञासा या शंका मन में उठे तो उसकी पूर्ति तत्संबंधी घटना प्रसंगों को पढ़कर की जा सकती है । छोटे-छोटे संस्मरण पढ़ने में भी सहज होते हैं और उनसे ली जाने वाली प्रेरणा हृदयंगम करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती । रोचकता से भरे इन संस्मरणों के स्वाध्याय से सभी का मन एकाग्रचित्त हो जाता है, साथ ही सदाचार, नीति, परोपकार, सेवा एवं उदारता जैसे सदगुणों की शिक्षाएँ भी प्राप्त हो जाती हैं ।
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