अमृत, पारस और कल्पवृक्ष की प्राप्ति
Quick Overview
मानव प्राणी सुख का अभिलाषी है | वह जो कुछ सोचता और करता है, सुख की अभिलाषा उसमें प्रधान रहती है | मानसिक विकास के साथ यह सुखाकांक्षा का दायरा भी बढ़ता जाता है |
मनुष्य का मस्तिष्क अधिक-से-अधिक जहाँ तक दौड़ सकता था, उसे दौड़ाकर उसने तीन कल्पना की हैं - (१) अमृतवाणी (२) पारस (३) कल्पव्रक्ष |
मृत्यु से पीछा छुड़ाकर मनमानी अवधि तक जीने के लिए अमृत, मनमानी धन-राशी जमा करने के लिए पारस और हर एक इच्छा को तुरंत पूरी हो जाने के लिए कल्पवृक्ष की उसने चाह की है | इन तीनों में से किसी का अस्तित्व यद्यपि प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जाता, तो भी इनके अस्तित्व के सम्बध में किंवदन्तियाँ सुनी और पढ़ी जाती हैं |
Product Description
अमृत, पारस और कल्पव्रक्ष जिस रूप में बताये जाते हैं, उस रूप में कहीं हैं या नहीं ? इसकी इन पंक्तियों के लेखक को कुछ विशेष जानकारी नहीं है, परन्तु अपने चिरकालीन अनुभव के आधार पर उसने ऐसे तत्वों का अस्तित्व पाया है, जिनको अपनाने से वह इतना ही आनंद, तृप्ति और संतोष प्राप्त कर सकता है, जितना उन तीन वस्तुओं के आधार पर प्राप्त करता | सत्य-प्रेम और न्याय यह तीन तत्व हैं, जिन्हें भूलोक के अमृत, पारस और कल्पव्रक्ष कह सकते हैं | इन तीन आध्यात्मिक तत्वों का अखंड ज्योति सदा से ही प्रचार और प्रसार करती चली आ रही है | उस प्रचार का संकलन पुस्तक के रूप में पाठकों के सामने उपस्थित कर रहे हैं | आशा है कि यह पुस्तक मानवजाति की सात्विकता को बढ़ाने में सहायक होगी |

