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समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान

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Number of Pages 342
Writer’s name पं० श्रीराम शर्मा आचार्य, ब्रह्मवर्चस्
Edition/Year of Publishing 1998
Hard Bound/Paper Back Hard Bound
Publisher name युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा

Quick Overview

 

भारत जिसमें कभी तैंतीस कोटि देवता निवास करते थे, जिसे कभी स्वर्गादपि गरीयसी कहा जाता था, एक स्वर्णिम अतीत वाला चिर पुरातन देश है जिसके अनुदानों से विश्व - वसुधा का चप्पा - चप्पा लाभान्वित हुआ है | भारत ने ही अनादी काल से समस्त संसार का मार्गदर्शन किया है | ज्ञान और विज्ञान की समस्त धाराओं का उदय, अवतरण भी सर्वप्रथम इसी धरती पर हुआ । पर यह यहीं तक सिमित नहीं रहा - यह सारे विश्व में यहाँ से फैल गया | सोने की चिड़िया कहा जाने वाला हमारा भारतवर्ष, जिसकी परिधि कभी सारी विश्व - वसुधा थी, आज अपने दो सहस्र वर्षीय अंधकार युग के बाद पुन: उसी गौरव की प्राप्ति की ओर अग्रसर है | परम पूज्य गुरुदेव ने जन - जन को उसी गौरव की जानकारी कराने के लिए यह शोध प्रबंध १९७३-७४ में अपने विदेशी प्रवास से लौटकर लिखाया एवं यह प्रतिपादित किया कि देव संस्कृति ही सारे विश्व को पुन: वह गौरव दिला सकती है जिसके आधार पर सतयुगी संभावनाएँ साकार हो सकें | उसी शोध प्रबंध को सितम्बर १९९० में पुन: दो खण्डों में प्रकाशित किया गया था | इस वाङ्मय में उस शोध प्रबंध के अतिरिक्त देव संस्कृति की गौरव - गरिमा परक अनेकानेक निबंध संकलित कर उन्हें एक जिल्द में बांधकर प्रस्तुत किया गया है |

 

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