ऋषि चिंतन के सान्निध्य में
Quick Overview
अब तक हम लोगों ने अरबों रूपए खर्च करके गायत्री यज्ञ सम्पन्न किए हैं | आइए, अब बिना खर्च किए अरबों का लाभ पहुँचाने वाला गायत्री ज्ञानयज्ञ करें | पूज्य गुरुदेव लिखते हैं -| साहित्य में लेखक की आत्मा निवास करती है | हम लोगों ने अनजाने में भावनावश पूज्य गुरुदेव की आत्मा, जो उनके साहित्य एवं पत्रिकाओं में निवास करती है, को आलमारी अथवा बोरों में बंद कर दिया है | यह सर्वथा अनुचित है | पूज्यवर की आत्मा घर -घर जाने लिए छटपटा रही है | धन की तीन गतियाँ -, दान व नाश होती हैं | उसी प्रकार साहित्य को पढ़ना उसका सदुपयोग, दूसरों को देना ज्ञानयज्ञ अन्यथा कीड़ों द्वारा नाश अवश्यंभावी है | पूज्यवर का साहित्य का कोई पन्ना रद्दी में न जाए, नष्ट न हों, इसका दायित्व हम सब पर है | उपभोग साहित्य सजीव होता है
Product Description
पूज्यवर का साहित्य शाश्वत सनातन है | कभी पुराना नहीं होता है | पुरानी पत्रिकाओं अथवा पुस्तकों पर गायत्री ज्ञानयज्ञ योजना की स्लिप लगाकर, अपना नाम व पता लिखकर पात्र व्यक्तियों को दान कर देनी चाहिए | पात्रता यह है कि व्यक्ति उसे पढ़ ले और किसी अन्य व्यक्ति को दे दे | गायत्री ज्ञानयज्ञ योजना की स्लिप आप किसी व्यक्ति द्वारा यहाँ से मँगा सकते हैं, डाक से भेजना संभव नहीं है | ऐसी स्लिप आप ऐसी स्थानीय स्तर पर भी छपवा सकते हैं | मिशन की समस्त पत्रिकाएँ लगभग १४,००,००० परिवारों में जाती हैं | यदि वे गायत्री ज्ञान यज्ञ योजना द्वारा एक परिवारों से दुसरे परिवारों में जाएँ और औसतन ५ परिवारों में जाकर पत्रिका रुक भी जाए तो ७५ लाख परिवारों में पत्रिका पहुँच जाएगी, जब कि खर्च, स्याही, कागज आदि उतना ही लगेगा | इस योजना में सभी को सहयोग करना चाहिए | युग निर्माण योजना पत्रिका के मुख्य प्रष्ठ पर यह मैटर नियमित छापा जा रहा है |

